कोरोना अफवाह के चलते थोक में 30 रुपए किलो बिक रहा मुर्गा, पोल्‍ट्री फॉर्म कारोबारी पहुंचे तबाही की कगार पर


चिकन कोरोना वायरस अफवाह की वजह से मुर्गे की मांग में की गई जबर्दस्‍त गिरावट


लखनऊ, 13 मार्च 2020, कोरोना वायरस का संक्रमण भारत के साथ ही पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है, इसके साथ ही इससे जुड़ी अफवाहें भी उड़ाई जा रही हैं, इन्‍हीं अफवाहों में से एक है चिकन का कोरोना वायरस की चपेट में आना, इसके कारण मुर्गें की बिक्री पर प्रतिकूल असर पड़ा है, हालात ये हो गए हैं कि चिकन का कारोबार घुटने के बल बैठ गया है, उत्‍तर प्रदेश के ज्यादातर पोल्ट्री कारोबारी बर्बादी की कगार पर पहुंच रहे हैं, वजह है कोरोना वायरस के चिकन से फैलने की अफवाह, इस अफवाह की वजह से बाजार में चिकन की मांग निचले स्‍तर तक पहुंच गया है. इससे पोल्ट्री फॉर्म कारोबारी से लेकर आढ़ती और फिर होटल संचालक, सभी परेशान हैं, वे समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर लोगों का चिकन से मोहभंग क्यों हो गया है। पोल्ट्री फॉर्म वाले थोक के भाव में पहले जिंदा मुर्गा 90 से 100 रुपये किलो तक बेचते थे, लेकिन अब जो बच गया है उसे खपाने के लिए 30 या 40 रुपये के भाव से बेचने को मजबूर हैं, अयोध्या में बड़ी पोल्ट्री फॉर्म चलाने वाले सत्येन्द्र सिंह बताते हैं कि जो मुर्गे बचे हैं, उन्हें बेचने के बाद चूजों की दूसरी खेप लाने की हिम्मत नहीं पड़ रही है, दूसरी ओर लखनऊ शहर में थोक के भाव से मुर्गा बेचने वाले जीशान बताते हैं कि पहले मुर्गे का गोश्त 150 से 160 रुपये किलो बिकता था, लेकिन अब 70 से 80 रुपये में बेचना पड़ रहा है, वहीं आज़मगढ़ दो प्याजा होटल चलाने वाले बबलू राय बताते हैं कि वह हर रोज मटन और मछली के साथ 15 किलो चिकन भी बनाते थे, लेकिन, अब एक या दो किलो मुर्गा ही पका रहे हैं, ताकि कोई ग्राहक वापस न लौटे, तीनों स्तरों पर चिकन के कारोबार को इस अफवाह से जबरदस्त धक्‍का लगा है।


पीजीआई की डॉक्टर उज्जवला घोषाल का दावा है कि चिकन और कोरोना वायरस के बीच कोई संबंध नहीं है ये सिर्फ अफवाह है


लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की हेड डॉ.उज्जवला घोषाल दावा है कि दोनों चिकन और कोरोना वायरस के बीच कोई संबंध नहीं है, ये सिर्फ अफवाह है, मुर्गा किसी भी सूरत में कोरोना वायरस को कैरी नहीं करता है, इसके खाने से किसी को भी इसके संक्रमण का कोई खतरा नहीं है।


रिपोर्ट @ आफाक अहमद मंसूरी