साई नदी में डूबने से नानी और नाती की हृदय विदारक मौत, मचा कोहराम


 


साई नदी में डूबने से नानी और नाती की हृदय विदारक मौत, मचा कोहराम।


रायबरेली: रायबरेली में बछरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत टेरा बरौला में साई नदी में डूबने से नानी और नाती की दर्दनाक मौत हो गई। एक साथ हुई नानी और नाती की मौत से गांव में कोहराम मच गया। परिजनों की करुण चीख से समूचा गांव कराह उठा। एक साथ हुई दो मौतों से गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया है। 
आपको बता दें कि, जानकारी के मुताबिक 75 वर्षीय मृतका रामकली पत्नी स्वर्गीय गुरुदीन निवासिनी छोटी खेड़ा ,मवई जनपद उन्नाव अपने 18 वर्षीय नाती अशोक कुमार पुत्र राम लखन निवासी टेरा बरौला, थाना बछरावां जनपद रायबरेली के साथ बुधवार को प्रातः 8 बजे मवई पेंशन निकालने गई थी। जिसने पेंशन निकालने के बाद घर के लिए सब्जी खरीदी और टेरा बरौला गांव के एक ग्रामीण को गांव आता देखकर उसे झोला थमा दिया। घर पहुंचे ग्रामीण ने मृतका रामकली की बेटी एवं मृतक अशोक की मां राधा को झोला देकर बताया कि, नानी और नाती दोनों लोग आ रहे हैं। 
कुछ समय बीतने पर शायं काल मां और बेटे की राह देखते हुए मृतका की बेटी राधा भी साई नदी पर पहुंच गई। जहां पुल की जगह साई नदी पर बनी चहली पार करते समय वृद्धा रामकली का पैर फिसल गया और वह साई नदी में चली गई। जिसे निकालने के लिए नदी में कूदी मृतका की बेटी राधा भी नदी में डूबने लगी, मां और नानी को डूबता देख उन्हें बचाने के लिए अपनी जान की परवाह किए बगैर नाती अशोक भी नदी में कूद गया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद राधा की तो जान बचा ली। किंतु नानी रामकली और नाती अशोक कुमार की जान बचाने में सफल नहीं हो सके। 
लिहाजा नदी में डूबने से दोनों की दर्दनाक मौत हो गई। गोताखोरों की मदद से देर रात नदी से वृद्धा रामकली का शव निकाल लिया गया। वहीं अधिक रात होने के चलते नाती का शव रात में नहीं मिल सका सुबह गोताखोर अयोध्या प्रसाद की मदद से ग्रामीणों ने नाती अशोक कुमार का भी शव खोज निकाला। नानी और नाती की मौत की खबर कुछ ही पलों में समूचे क्षेत्र में जंगल में आग की तरह फैल गई। 
घटना स्थल और गांव में लोगों का मजमा लग गया। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया है। 
क्षेत्राधिकारी राघवेंद्र चतुर्वेदी का कहना है कि, नदी पार करते समय वृद्धा रामकली का साई नदी में पैर फिसल गया था। जिन्हें बचाने के लिए नदी में कूदे अशोक कुमार और रामकली की नदी में डूबने से मौत हो गई। वहीं अशोक की मां राधा जो अपनी मां रामकली को बचाने के लिए नदी में कूदी थी उन्हें बचा लिया गया है। ग्रामीणों एवं गोताखोरों की मदद से वृद्धा रामकली व अशोक को बचाने की काफी कोशिश की गई किंतु उन्हें नहीं बचाया जा सका। 
पुल होता तो न जाती जान 
टेरा बरौला ग्राम प्रधान एवं ग्रामीणों का कहना है कि, यदि साई नदी पर पुल बना होता तो आज नानी और नाती की जान न जाती। ग्रामीणों का कहना है कि, साई नदी पर पुल बनवाने के लिए उन्होंने शासन से कई बार मांग की किंतु शासन की ओर से सिर्फ झूठा आश्वासन मिला। यदि साई नदी पर पुल बना होता तो नानी और नाती की जान ना जाती। ग्रामीणों का कहना है कि, आज दोनों जाने शासन की उदासीनता से गई हैं। शासन को पीड़ित परिवार को कम से कम 20 लाख की आर्थिक मदद देनी चाहिए। 
बहादुर बेटा जान गवा कर भी नहीं बचा पाया नानी की जान 
मृतक अशोक की मां राधा के मुताबिक उसका बेटा पानी में तैर नहीं पाता था उसके बावजूद जैसे ही उसने उन्हें और उनकी मां को डूबता देखा बगैर किसी प्रकार की देरी किए आवाज लगाता हुआ नदी में कूद गया। किन्तु दुर्भाग्य है कि, बेटे की चीख-पुकार सुनकर दौड़े लोगों की मदद से उनकी जान तो बच गई पर लाख कोशिशों के बावजूद उनके बहादुर बेटे और उनकी मां की जान नहीं बचायी जा सकी। 
छिन गया सहारा 
पीड़िता मां राधा का कहना है कि, उनके पति का 4 वर्ष पूर्व निधन हो गया था। अशोक ही उनका सहारा था। मां और बेटे की मौत से पीड़िता राधा के ऊपर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। 
एक ही घर से उठेंगी दो अर्थियां 
एक साथ हुई नानी और नाती की मौत से एक ही घर से एक साथ दो अर्थियां उठेंगी। एक साथ हुई 2 मौतों से समूचे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। इस हृदय विदारक घटना से हर कोई आहत है। 
शासन के प्रति ग्रामीणों में रोष, दी आंदोलन की चेतावनी 
साई नदी पर पुल का निर्माण ना होने से हुई 2 हृदय विदारक मौतों से शासन के प्रति ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। जल्द ही साई नदी पर पुल का निर्माण ना होने पर ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब चुनाव आता है तभी नेताओं को नदी पर पुल बनवाने की याद आती है और हर बार छलावी वादा करके चले जाते हैं। चुनाव जीतने के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि गांव में दिखाई नहीं पड़ता।


त्रिलोकी नाथ 
  रायबरेली